त्वरित टिप्पणी

अब असंतुष्टों को साधने की कवायद


कांग्रेस के विधायकों की लुका-छिपी का खेल अब लगभग समापन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है और साथ ही डैमेज कंट्रोल के लिए कमलनाथ सरकार के नुमाइंदे भी सक्रिय हो गए हैं। ऐसा लग रहा है कि अब असंतुष्टों को साधने हेतु कमलनाथ सरकार मंत्रिमंडल के विस्तार का पांसा फेंक सकती है। वास्तव में देखा जाए तो असंतुष्टों को साधने का इससे बेहतर विकल्प अब कांग्रेस के पास है भी नहीं।


गुटबाजी से ग्रस्त कांग्रेस के विधायकों की निष्ठा शुरू से ही अपने संरक्षकों के प्रति रही है, इसीलिए इस तरह की समस्या वहां अक्सर खड़ी हो जाती है। वैसे गुट तो भाजपा में भी हैं, किन्तु उसका केन्द्रीय नेतृत्व इतना सशक्त है कि गटबाजी का विपरीत प्रभाव कभी ज्यादा नुकसान नहीं कर पाताएक अनुशासित पार्टी होने के साथ ही भाजपा संगठनात्मक रूप से काफी मजबूत है, जबकि कांग्रेस का संगठन अब उतना मजबूत नहीं रहा, जैसा कि होना चाहिए।


कांग्रेस की निगाहें जहां एक तरफ असन्तुष्टों को साधने पर टिकी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ वह विपक्ष के दो-चार विधायकों को कांग्रेस में शामिल करने पर भी विचार कर सकती है, ताकि राज्यसभा चुनाव के पूर्व वह अपनी स्थिति को और भी मजबूत कर सके। शह और मात का यह खेल मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए कोई नई बात नहीं है। पहले भी, कई अल्पमत सरकारें डांवाडोल होती देखी गई हैं, लेकिन अभी यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि इस सारी उठापटक का अंजाम क्या होगा?