संपादकीय

कोरोना का कहर बना वैश्विक संताप


किसे मालूम था कि चीन के वुहान शहर से प्रकाश में आया कोरोना वायरस मात्र 2-3 माह में सम्पूर्ण विश्व का संताप बन जाएगा। आज स्थिति भले ही इतनी नाजुक न लग रही हो, किन्तु इस जानलेवा वायरस के भय से सारा विश्व सिहर-सा गया है। विभिन्न मंचों पर तरह-तरह की बातें हो रही हैं और मीडिया पर भी इसे काफी कवरेज मिल रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि एक बहुत बड़ी महामारी ने इस बार दस्तक दी है।


कोरोना वायरस के कारण और इसके निदान को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम तरह के आलेख व स्पष्टीकरण आ रहे हैं, किन्तु यह कहना मुश्किल है कि ये निदान के फार्मूले कहां तक कारगर सिद्ध हो सकते हैं। अभी तक जारी विभिन्न मेडिकल बुलेटिनों में लोगों को ऐहतियात बरतने पर अधिक जोर दिया जा रहा है, लेकिन फिर भी आम लोगों में विश्वास कम, दहशत अधिक है। कोरोना के कहर की गंभीरता और इसके खतरे का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि ओलंपिक खेलों जैसे आयोजन तक संकट में आ गए हैं, अगर कोरोना का विस्तार इसी तरह होता रहा तो भविष्य में अनेक इसी तरह के आयोजन स्थगित करने पड़ सकते हैं।


चीन, कोरिया, इटली, ईरान एवं कुछ अन्य देशों में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ने से सारा विश्व चिन्तित है। अभी तक तो भारत में भी सब कुछ सामान्य चल रहा था, किन्तु जैसे ही आगरा, जयपुर एवं केरल में इसके संभावित मरीज मिले, देश में हड़कंप मच गया। दिल्ली- एनसीआर के कई स्कूलों को बंद कर छुट्टी का ऐलान करना पड़ा। पिछले 24 घंटे में दस नए मरीज मिलने से शासन व प्रशासन दोनों ही हरकत में आ गए हैं और सुरक्षात्मक तरीके अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। कोरोना वायरस की मार से लोगों के स्वास्थ्य पर तो चोट पड़ी ही है, साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा हैचीन का बाजार तो एकदम चौपट-सा हो गया है। भारत ने भी कोरिया, इटली व जापान से आने वालों पर अस्थाई रूप से रोक लगा दी है। इस वायरस का प्रकोप यदि वास्तव में महामारी बन गया तो यह मानवता के लिए इस सदी का सबसे बड़ा खतरा साबित हो सकता है।